
Rajasthani Folk Song · 01
Modern Moru Bai Rajasthani Folk Song
Traditional Moru Bai Reimagined by R.K. Pema
Moru Bai is R.K. Pema’s modern interpretation inspired by the Rajasthani folk-song tradition. It brings a familiar cultural theme to a new recording while celebrating the voice and storytelling of Rajasthan.
Listen to the song
About this recording
Created by R.K. Pema with Suno as part of his mission to save, enrich, and share folk songs. This recording is a modern interpretation; the lyrics and musical arrangement should be credited according to their actual sources.
Lyrics
मोरू बाई री पुकार
मुखड़ा
म्हारा बीरा, एक वार आवो रे, म्हाने पीहर री डगर दिखावो रे। सासरै री रेत में पग धँस जावै, म्हारो मन डूँगरां में उड़ जावै।
अंतरा १
यहाँ दूर-दूर तक धोरा ही धोरा, पवन उड़ावै रेत सुनहरी। वहाँ पहाड़ां री छाँव तले थी, मायड़ री बोली मीठी-मीठी। आँख भरै तो चुपके पोंछूँ, मायड़ ने याद करूँ मैं घणी।
अंतरा २
बाबो बैठो होसी आँगण में, राह निहारै साँझ-सवेरे। मायड़ पूछै होसी हर पंछी सूँ, “मोरू री खबर लायो मेरे?” कहजो, बेटी सुखी है सासरै, बस पीहर री याद सतावै रे।
अंतरा ३
याद आवै वो बचपन री पगडंडी, हँसता-हँसता डूँगर चढ़णो। तेरे संग में फूल चुनणो, बीरा, थककर मायड़ री गोद में पड़णो। एक दिन फिर वो राह चलावो, बचपन सूँ मिलणो चाहूँ रे।
अंतिम अंतरा
सासरै रो मान रखूँ मैं बीरा, यह घर भी अब म्हारो है। पर बेटी रो मन पीहर सूँ जुड़्यो, उस डोरी में प्यार घणो है। आवो, कुछ दिन घर ले चालो, फिर हँसती-हँसती लौटूँ रे।
समापन
म्हारा बीरा, एक वार आवो रे, मायड़-बाबा सूँ मिलवावो रे। धोरां में रहूँ, डूँगर मन में, मोरू बाई री बात सुनो रे।
